जलकुंभी से दूषित पानी को करीब 70% तक शुद्ध किया जा सकेगा, राष्ट्रीय शर्करा संस्थान ने विकसित की तकनीक, पहले से बहुत कम लागत

देशभर के उद्योग धंधों से निकलने वाला पानी हर जगह जल प्रदूषण ही फैलाता रहता है ये न सिर्फ पर्यावरणविद बल्कि साइंटिस्टों के लिए भी चिंता का विषय था पर अब एक नये शोध के अनुसार जलकुम्भी से बहुत कम लागत में इस दूषित पानी को करीब 70% तक शुद्ध किया जा सकेगा। आइये जानते हैं पूरी रिपोर्ट क्या है।

इन उद्योगों में ज्यादा दूषित पानी निकलता है

असल में देश भर के उद्योग धंधों में सामान धोने या उनकी साफ़ सफाई करने के लिए और कई उधोगों में जैसे कोल्ड्रिंक, जूस आदि में तो पानी का इस्तेमाल एक इंग्रेडिएंट की तरह होता है पर ये उतना विषैला नहीं होता है। पर चमड़े के काम वाली कंपनियों या चीनी मीलों से आने वाला पानी काफी हद दूषित हो जाता है। क्योंकि उसमें केमिकल भी मिले होते हैं। और इस दूषित जल को साफ़ करना और उसे रिसाइकिल करके उपयोग लायक बनाने एक बड़ा ही कठिन काम है। यह न सिर्फ कठिन काम है बल्कि यह काफी महंगा भी है।

दूषित पानी को साफ़ करने की विधियां महंगी

दरअसल दूषित पानी को साफ करने में जो तकनीक अभी तक इस्तेमाल होती है वह बेहद महंगी होती है. यही कारण है कि ज्यादातर चीनी मिलों द्वारा यह पानी ऐसे ही फेंक दिया जाता है। ये पानी प्रदूषण भी काफी फैलता है। इसलिए इससे निजात पाने के लिए कई शोध राष्ट्रीय शर्करा संस्थान द्वारा किए जा रहे हैं. इसी क्रम में कानपुर स्थित राष्ट्रीय शकर्रा संस्थान को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है. संस्थान ने एक ऐसी तकनीक तैयार की है. जिसके जरिए बेहद कम खर्चे में दूषित पानी को शुद्ध बनाया जा सकेगा. इतना ही नहीं यह पानी पीने योग्य भी होगा .

जलकुंभी से शुद्ध होगा पानी

जलकुम्भी जिसे इंग्लिश में Pyromaniac भी कहते हैं यह वास्तव में तालाबों, पोखरों में उगने वाली खरपतवार है और खासबात ये है कि बिना किसी ख़ास प्रयास के ये तालाबों वैगरह में उग जाती है अब इससे ही यह पानी शुद्ध बनाया जाएगा.

जलकुंभी के इस्तेमाल से मल्टीग्रेड फिल्टर एवं पाउडर एक्टिव कार्बन के प्रयोग से इस पानी को साफ किया जाएगा. राष्ट्रीय शर्करा संस्थान के निदेशक नरेंद्र मोहन ने बताया कि संस्थान के भौतिक रसायन अनुभाग की ओर से कई दिनों से एक ऐसी तकनीक बनाने में काम चल रहा था. जिससे दूषित पानी को शुद्ध किया जा सके.

अब इस प्रयोग में सफलता मिल गई है. इसलिए अब जलकुम्भी के प्रयोग से बीओडी, सीओडी, नाइट्रोजन, सस्पेंडेड सॉलिड्स, कीटनाशकों और हेवी मेटल्स को दूर करना आसान है और यह बेहद कारगर भी है.

जलकुम्भी से कितना साफ होगा पानी?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस तकनीक के इस्तेमाल से चीनी मिलों से निकलने वाले दूषित पानी को लगभग 70% शुद्ध पीने योग्य बनाया जा सकेगा. लिहाजा इस तकनीक के इस्तेमाल से जहां एक तरफ जहां दूषित पानी को साफ किया जा सकेगा और उन्हें रीसायकल करके चीनी मिलों में फिर से इस्तेमाल किया जा सकेगा और कुछ मामलों में तो इस पानी को पीने योग्य भी बनाया जा सकेगा.

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