पति ने सैलरी बताने से किया इंकार तो पत्नी से RTI की मदद से ले ली सारी जानकारी, आप भी जाने RTI की मदद से सैलरी जानने का प्रोसेस

बहुत पुरानी कहावत भी है कि मर्द से उसकी कमाई और औरत से उसकी उम्र नहीं पूछनी चाहिये। और बहुत लोग अपनी कमाई बताने से परहेज भी करते हैं। पर जब बात आपके पति या पत्नी की हो तो अपनी कमाई छुपाने से पहले ये भी सोच लेना चाहिये दूसरा व्यक्ति आपकी कमाई RTI की मदद ले कर भी जान सकता है।

पत्नी ने मांगी पति की जानकारी

अभी हाल ही में एक ऐसा ही वाकया हुआ कि पत्नी ने अपने पति से कमाई पूछी तो पति ने बताने से इंकार कर दिया और अपनी अपनी आय संबंधी जानकारी और बैंक अकाउंट डिटेल्स लोगों से छुपा कर ही रख ली। इसके बाद उस महिला ने अपने पति की सही सही आय जानने के लिए एक RTI (Right to information) दायर कर जानकारी मांगी है।

क्या था ये पूरा मामला?

हुआ ये कि दिल्ली की एक महिला संजू गुप्ता ने अपने पति की आय से सम्बन्धी जानकारी अपने पति से मांगी जिसे उसके पति ने इंकार कर दिया। इस पर महिला संजू गुप्ता ने आरटीआई के जरिए अपने पति की आय का ब्योरा मांगा तो पहले तो को स्थानीय आयकर कार्यालय के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी (CPIO) ने खारिज कर दिया और इस मामले में कोई भी जानकारी देने से मना कर दिया क्योंकि पति ने इसके लिए सहमति नहीं दी थी।

इसलिए पत्नी को चाहिये थी जानकारी

इसके बाद CIC ने अपने पिछले कुछ पूर्व में दिए आदेशों, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के फैसलों पर गौर किया. इसके बाद CIC ने इस मामले में CPIO को निर्देश दिया कि वह 15 दिन के भीतर पति की नेट टैक्सेबल इनकम/ग्रॉस इनकम की जानकारी पत्नी को उपलब्ध कराए. दरअसल वैवाहिक विच्छेद के मामले में सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत पत्नी को सैलरी डीटेल्स देने से इनकार नहीं किया जा सकता.

पत्नी का भरण पोषण का मामला हो तो आय नहीं छुपाई जा सकती

वहीं इसी तरह के दूसरे मामले में कोर्ट के अनुसार “जहां मामला पत्नी के भरण-पोषण से संबंधित है, पति के वेतन की जानकारी निजी नहीं हो सकती है।ऐसे मामलों में पत्नी को वेतन संबंधी जानकारी का भी अधिकार हो सकता है ऐसा कहा गया था। ” इस मामले में CIC ने CPIO को पति की शुद्ध कर योग्य आय/सकल आय पत्नी को 15 दिनों के भीतर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

यह सारी जानकारी निजी होती हैं

कोर्ट ने यह भी कहा कि संपत्ति, देनदारियां, आयकर रिटर्न, निवेश विवरण, ऋण आदि व्यक्तिगत विवरण की श्रेणी में आते हैं। हालांकि जनहित की शर्तें पूरी करने के लिए इन बातों की अनुमति दी जाती है। पर फिर भी अगर कोई मामला किसी के भरण पोषण से संबंधित है तो ये जानकारी भी दी जा सकती है।

Image Credit – Indiatimes

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