iNCOVACC – भारत बायोटेक ने बनाई दुनिया की पहली नेजल कोरोना वैक्सीन, सरकार से मिली मंजूरी, बूस्टर डोज के तौर पर प्राइवेट अस्पतालों में मिलेगी

iNCOVACC – भारत सरकार ने दुनिया की पहली नेजल कोरोना वैक्सीन ( nasal corona vaccine ) को बूस्टर डोज के तौर पर इस्तेमाल करने की मंजूरी दे दी है।

इसे कोवैक्सिन बनाने वाली हैदराबाद की भारत बायोटेक ने इसे वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन (WUSM) के साथ मिलकर बनाया है। इस नाक से ली जाने वाली को बूस्टर डोज के तौर पर आज से ही लगाया जा सकेगा। ये वैक्सीन प्राइवेट अस्पतालों में मिलेगी और आपको इसके पैसे चुकाने पड़ेंगे अभी इसे सरकारी अस्पतालों में देने की योजना नहीं बात नहीं कही गयी है। एक न्यूज एजेंसी के मुताबिक इसे आज से ही कोरोना वैक्सीनेशन प्रोग्राम में शामिल कर लिया गया है। भारत बायोटेक की इस नेजल वैक्सीन का नाम iNCOVACC रखा गया है। पहले इसका नाम BBV154 था। इसे नाक के जरिए हमारे शरीर में पहुंचाया जाएगा। इसे पोलियो वैक्सीन की तरह ही इस नेजल वैक्सीन की भी 4 ड्रॉप्स काफी हैं। जिसे दोनों नॉस्ट्रिल्स या नाक के छिद्र में दो-दो ड्रॉप्स डाली जाएंगी।

इस नेजल वैक्सीन के कई लाभ

ये वैक्सीन शरीर में जाते ही यह कोरोना के इन्फेक्शन और ट्रांसमिशन दोनों को ब्लॉक करती है। इसका मतलब ये है कि ये वैक्सीन आपके इन्फेक्शन को तो समाप्त करती ही है साथ ही ये नाक में मौजूद इन्फेक्शन को वहीं समाप्त करती है जिससे ये बीमारी और लोगों तक नहीं फैलती। एक और फायदा ये भी है कि इस वैक्सीन में इंजेक्शन की जरूरत नहीं पड़ती, इसलिए इससे चोट लगने का खतरा नहीं है। साथ ही हेल्थकेयर वर्कर्स को भी खास ट्रेनिंग की जरूरत नहीं पड़ेगी।

क्या होती है ये नेजल वैक्सीन ?

सामान्य वैक्सीन हमें मांसपेशियों में इंजेक्शन के जरिए लगाई जाती है। जिसे इंट्रामस्कुलर वैक्सीन कहते हैं। नेजल वैक्सीन वो होती है जिसे नाक के जरिए दिया जाता है। क्योंकि ये नाक के जरिए दी जाती है इसलिए इसे इंट्रानेजल वैक्सीन कहा जाता है। यानी इसे न तो इंजेक्शन से देने की जरूरत है और न ही ओरल वैक्सीन की तरह ये पिलाया जाता है। यह एक तरह से नेजल स्प्रे जैसी है। जिसमें इसकी कुछ बूंदे नाक में डाल दी जाती हैं

नेजल वैक्सीन काम कैसे करती है?

कोरोनावायरस समेत कई माइक्रोब्स (सूक्ष्म वायरस) म्युकोसा (गीला, चिपचिपा पदार्थ जो नाक, मुंह, फेफड़ों और पाचन तंत्र में होता है) के जरिए शरीर में जाते हैं। नेजल वैक्सीन सीधे म्युकोसा में ही इम्यून रिस्पॉन्स पैदा करती है। यानी, नेजल वैक्सीन वहां लड़ने के लिए सैनिक खड़े करती है जहां से वायरस शरीर में घुसपैठ करता है। नेजल वैक्सीन आपके शरीर में इम्युनोग्लोबुलिन A (igA) प्रोड्यूस करती है। माना जाता है कि igA इन्फेक्शन को अर्ली स्टेज में रोकने में ज्यादा कारगर होता है। ये इन्फेक्शन रोकने के साथ-साथ ट्रांसमिशन को भी रोकता है।

यह बाकी वैक्सीन से कितनी अलग है?

देश में अब तक कोरोना से लड़ने के लिए 8 वैक्सीन को मंजूरी मिल चुकी है। पर ये सभी इंट्रामस्कुलर वैक्सीन हैं, जिन्हे इंजेक्शन के जरिए दिया जाता है।
वहीं, iNCOVACC पहली इंट्रानेजल वैक्सीन है जिसे सरकार से इसे मंजूरी मिली है । अभी तक देश में स्पूतनिक, कोवीशील्ड और कोवैक्सिन लगाई जा रही है। ये तीनों वैक्सीन डबल डोज वैक्सीन हैं। iNCOVACC को केवल एक बार ही दिया जाएगा।

नेजल वैक्सीन की एक डोज ही है कारगर

अभी तक भारत में लग रही सभी वैक्सीन के दो डोज दिए जा रहे हैं। दूसरे डोज के 14 दिन बाद वैक्सीनेट व्यक्ति सेफ माना जाता है। जबकि नेजल वैक्सीन 14 दिन में ही असर दिखाने लगती है। साथ ही इफेक्टिव नेजल डोज न केवल कोरोना वायरस से बचाएगी, बल्कि बीमारी फैलने से भी रोकेगी। और इससे मरीज में माइल्ड लक्षण भी नजर नहीं आएंगे। वायरस भी शरीर के अन्य अंगों को नुकसान नहीं पहुंचा सकेगा। यह नेजल वैक्सीन सिंगल डोज वैक्सीन है, इस वजह से ट्रैकिंग आसान है। इसके साइड इफेक्ट्स भी इंट्रामस्कुलर वैक्सीन के मुकाबले कम हैं। साथ ही इसका एक और बड़ा फायदा यह है कि सुई और सीरिंज का कचरा भी कम होगा।

नेजल वैक्सीन अब बूस्टर डोज की तरह दी जाएगी

अब भारत सरकार से मंजूरी मिलने के बाद इंट्रानेजल वैक्सीन को कोवैक्सिन और कोवीशील्ड जैसी वैक्सीन्स लेने वालों को बूस्टर डोज के तौर पर दिया जाएगा। हालांकि इसे प्राइमरी वैक्सीन के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ इसके सामान्य परंपरागत वैक्सीन के मुकाबले बहुत सारे लाभ हैं।

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