Basmati Rice : अब कोई दुकानदार नकली बासमती से बेवकूफ नहीं बना पायेगा, FSSAI ने पहली बार बताई असली बासमती चावल की पहचान

FSSAI Basmati Rice News : हम लोगों को दूकानदार अकसर नकली बासमती चावल देकर बेवकूफ बना देते हैं क्योंकि अभी तक असली बासमती चावल को पहचानने के लिए का कोई नियम था पर हाल ही में FSSAI ने बताया है कि बासमती चावल में प्राकृतिक सुगंध और गुण होना चाहिए।

पर इसकी कीमत गैर बासमती से काफी ज्‍यादा होती है लिहाजा दुकानदार इसमें मिलावट करके ऊंची कीमतों पर बेच देते हैं. और यहाँ ध्यान देने की बात है कि अप्रैल-नवंबर के दौरान इस साल बासमती चावल का निर्यात 39 फीसदी बढ़कर करीब 23 हजार करोड़ रुपये रहा.

हमारे देश में बासमती चावल का क्रेज बहुत ज्‍यादा है और यह मध्‍य वर्गीय परिवारों के स्‍टैंडर्ड का भी हिस्‍सा है. लेकिन, अक्‍सर हम असली बासमती चावल की पहचान नहीं कर पाते और दुकानदार भी हमें चूना लगा जाते हैं. अब ऐसा नहीं होगा, क्‍योंकि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने उपभोक्‍ताओं को असली बासमती चावल की पहचान (basmati rice identification) करने के लिए खास तरीका बताया है. FSSAI ने पहली बार बासमती का स्‍टैंडर्ड बताया है.

अभी हाल ही में FSSAI ने देश में बिकने वाले सभी तरह के बासमती चावल के रूप-रंग और सुगंध को लेकर कुछ मानक तैयार किए हैं, जो 1 अगस्‍त 2023 से लागू होंगे. इसमें ब्राउन बासमती चावल, मिल्‍ड बासमती चावल, उसना भूरा बासमती और मिल्‍ड उसना बासमती चावल शामिल है.

स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने बताया है क‍ि FSSAI ने पहली बार बासमती चावल के स्‍वाद और सुगंध को लेकर स्‍पष्‍ट व्‍याख्‍या दी है और अब किसी भी ग्राहक के लिए इसकी पहचान करना आसान हो जाएगा. दुकानदार भी चावल में मिलावटी सुगंध के जरिये बासमती बताकर उसे नहीं बेच सकेंगे।

ऐसे होगी गैर बासमती की मिलावट पर रोक

मिलावट के बहुत सारे और उनकी शिकायतों के बाद इस पर रोक लगाने के लिए FSSAI क्‍वालिटी पैरामीटर (fssai standards for basmati rice) बना रहा है. क्योंकि मिलवट के सबसे ज्‍यादा मामले गैर बासमती को लेकर ही आते हैं. चूंकि, इसकी कीमत गैर बासमती से ज्‍यादा होती है लिहाजा दुकानदार इसमें मिलावट करके ऊंची कीमतों पर बेच देते हैं. भारत के बासमती को सिर्फ भारत ही नहीं दुनियाभर में पसंद किया जाता है.

असली बासमती चावल के रंग-रूप और सुगंध से छेड़छाड़ बर्दाश्‍त नहीं

FSSAI के अनुसार कि बासमती चावल में प्राकृतिक सुगंध और गुण होना चाहिए. और ख़ास बात ये है कि इसके नेचुरल स्‍वाद से छेड़छाड़ बर्दाश्‍त नहीं की जाएगी. साथ ही इसमें कोई कृत्रिम रंग या सुगंध के साथ पॉलिश वाले तत्‍व नहीं होने चाहिए. इन मानकों में चावल के आकार, गुणवत्‍ता और पहचान भी निर्धारित की गई है. यहां तक कि इसमें चावल के दाने का आकार, पकाने के बाद उसकी लंबाई, नमी की अधिकतम सीमा, इमाइलोज की मात्रा, यूरिक एसिड और इसमें टूटे चावल की मिलावट का भी जिक्र किया गया है.

FSSAI जल्द ही जारी करेगा बासमती चावल के मानक

सूत्रों के अनुसार FSSAI ने नियामकीय स्‍टैंडर्ड तो नोटिफाई कर दिए हैं और उन्हें जल्‍द ट्रेडर्स, एक्‍सपोर्टर और सरकारी विभागों से बातचीत कर कम्‍पलीट मानक तैयार किया जाएगा. इसके बाद ही इसे सार्वजनिक ( basmati rice FSSAI release best characteristics and identification ) किया जायेगा जिससे आम ग्राहकों के लिए बासमती की पहचान करना आसान हो जाएगा.

देश में बासमती चावल का उत्‍पादन

भारत में हर साल करीब 90 लाख टन बासमती चावल का उत्‍पादन होता है, जिसमें से 40 लाख टन का निर्यात हो जाता है. वित्‍तवर्ष 2021-22 में भी भारत ने 40 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया था, जिससे करीब 28 हजार करोड़ रुपये कमाई हुई थी. और यह पिछले साल से करीब निर्यात 39 फीसदी बढ़ा था।

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